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Ballia : 14 से 17 नामांकन, 01 जून को चुनाव अब 04 जून को मतगणना

रोशन जायसवाल
बलिया।
कुल 21 दिन का चुनावी सफर में कौन होगा बलिया का सांसद अब फैसला नजदीक है, जहाँ एक तरफ भाजपा और सपा का रोचक मुकाबला रहा, वहीं बसपा का संघर्ष भी रहा है। अब चर्चा यह हो रही है कि दलित वोट किधर रहा है, क्यों कि इस पूरे चुनाव में दलित वोट ने यह सस्पेंस पैदा कर दिया है कि उनका रुझान किधर रहा। क्या उनका परंपरागत वोट बसपा के साथ रहा या फिर भाजपा और सपा के साथ यह बताना बड़ी मुश्किल है यह तो बन्द ईवीएम ही बता सकता है कि इस बार के चुनाव में दलित मतदाता किधर रहा। वैसे 2014 के चुनाव के बाद दलित वोट बिखर गया कभी 2019 के चुनाव सपा, बसपा समर्पित प्रत्याशी सनातन पांडे के साथ रहा, तो कभी अन्य राजनैतिक दलों के साथ। अब 2024 में दलितों ने किसको अपना वोट किया है यह चुनाव परिणाम बताएगा। 2007 जब पूर्ण बहुमत में बसपा कि सरकार यूपी में बनी उसके बाद बलिया में हुए उप चुनाव में बसपा से विनय शंकर तिवारी मैदान में उस समय बसपा का परंपरागत वोट बसपा प्रत्याशी विनय शंकर तिवारी को मिला। वहीं 2009 में बसपा से संग्राम यादव लड़े उनके भी झोली में दलितों का वोट गया। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में ई0 वीरेन्द्र पाठक टुन जी लड़े और दलितों के वोट के बल पर तीसरे स्थान पर रहे, उसके 10 वर्ष बाद बसपा ने यादव चेहरा पर दांव खेलते हुए लल्लन सिंह यादव को मैदान में भेजा अब देखना यह होगा कि रिजल्ट क्या आता है।

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