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Ballia : कवि सम्मेलन: इश्क की एक मुकम्मल कहानी हूं मैं

रोशन जायसवाल,

बलिया। ऐतिहासिक ददरी मेला के भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कला मंच पर रविवार की रात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें राष्ट्रीय

स्तर के दिग्गज कवियों की प्रस्तुतियों में हास्य-व्यंग था तो देशप्रेम पर भी कवियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों मन मोह लिया। हालांकि बगैर उद्घाटन के ही कवि सम्मेलन की शुरूआत हुई। श्रृंगार की कविताओं पर तालियां बजीं तो हास्य पर खूब ठहाके भी लगे।

वीर रस की कविताओं पर बागी धरती के लोगों ने खूब वाह-वाह किया। दे रात्रि तक कविता प्रेमी टस से मस नहीं हुए। कवयित्री सरिता

शर्मा ने सुर संधान तुम्हीं, गीत विधान तुम्हीं कविता प्रस्तुत किया पूरा पंडाल लोगों के तालियों की गड़गड़हट से गूंज उठा। कवि विकास

बीरबल ने रक्त से सजी है और परिचय प्रथम कराया गुरूजी ने कविता गाकर लोगों का मनोरंजन किया। इसके बाद उन्होंने हिंद वाले शेर पाक जाकर दहाड़ देंगे गीदड़ वहां के सारे डर के मर जाएंगे प्रस्तुत किया। ठंड के बावजूद भी देर रात तक लोग जमे रहे और

कविताओं का आनंद लेते रहे। इसके बाद अभय सिंह निर्भिक ने अपने तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे, उसके बाद भारत में तो भारत के कानूनों को अपनाना होगा के साथ ही सत्ताधारी के कर्माें पर जब जब शक होता प्रस्तुत किया तो दर्शकों ने खूब तालियां बजायी।

कवि दानबहादुर सिंह ने भूला बिसरा गीत नहीं मैं जो गाया ही न जाऊं गाकर खूब वाहवाही बटोरी। नेहा दुबे, दिव्या दुबे ने इश्क की एक मुकम्मल कहानी हूं मैं, जिसमें राजा है तू और रानी हूं मैं सुनाया तो दर्शक वाह वाह कह उठे।

उसके बाद उन्होंने तुम आ जाओ पास मेरे मैं दिल से गीत सुनाउंगी, तुम जीवनी की पुष्ठ बनो मैं महाकाव्या बन जाउंगी, रच जाउगी

प्रस्तुत किया। इसके बाद कवि पंकज प्रखर ने जब देशभक्ति पाठ किया तो उपस्थित लोगों में देश के प्रति भक्ति उमड़ पड़ी और लोगों

ने पंडाल में ही भारत माता की जय के नारे लगाने लगे। उन्होंने हिन्दुस्तानी शेर हूं मुझे दुश्मन से टकराने दो प्रस्तुत किया तो लोगों में

देशभक्ति का जज्बा हिलोरे मारने लगा। ददरी मेला में लोगों ने देर रात तक कवि सम्मेलन का आनंद लेते रहे। इसके पहले नगरपालिका परिषद के चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी ने सभी कवियों को माला पहनाकर सम्मानित किया।

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