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अवैध वसूली के आगे टीएसआई को नहीं दिखता जाम, चंद पैसों के लिए नोइंट्री में करा देते है इंट्री

बलिया। जाम की समस्या शहर के लिए नासूर बन गई है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह टीएसआई सुरेशचंद्र द्विवेदी और उनके मातहत की अवैध वसूली है। चंद पैसों के लिए यातायात पुलिस टीएसआई सुरेशचंद्र के इशारों पर नोइंट्री में ही इंट्री करा देते हैं, नतीजन लोगों को हर रोज जाम का सामना करना पड़ता है। लोग समय से अपने काम पर नहीं जा पाते हैं या फिर कोर्ट में उनकी तारीख छूट जाती है। टीएसआई सुरेशचंद्र द्विवेदी का यह खेल बीते कई वर्षों से चला आ रहा है, इस लेकर छात्र संगठनों ने कई बार डीएम से मिलकर शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन टीएसआई की ऊंची पहुंच के आगे जिलाधिकारी भी मानो बेबस है।
बलिया शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए शहर में सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक नो इंट्री लगाई गई। लेकिन नोइंट्री का पालन कराने की जिम्मेदारी जिस यातायात पुलिस के पास है वह खुद ही मुट्ठीभर पैसों के लिए नोइंट्री में इंट्री करा देते हैं। ऐसे में जब बड़े वाहन चित्तू पांडेय चौराहा क्रास कर शहर के अंदर प्रवेश करता है तो पीछे छोटे वाहनों का रेला लग जाता है। बस फिर क्या एक बार जो जाम सुबह नौ बजे लगना शुरू हो जाता है रात आठ बजे तक बदस्तूर रहता है। ऐसे में भला जाम से बलियावासियों को निजात कैसे मिलेगी!

सुरेश चंद्र द्विवेदी टी एस आई (फाइल फोटो)

20 रुपये की वसूली पर रोड पर खड़ा कराते है ई-रिक्शा
बलिया। तत्कालीन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगरौत ने ई-रिक्शा वालों के लिए नियम बनाया था कि कोई भी ई-रिक्शा कहीं भी खड़ा नहीं होगा बल्कि चलते-चलते सवारी ढोने का काम करेगा। तत्कालीन डीएम के इस आदेश को बलिया टीएसआई ने कुछ दिन तक तो पालन कराया, लेकिन उनके तबादले और नए डीएम के आने के बाद टीएसआई यहां भी अपना अवैध कमाने का जरिया बना लिया है। एक ई-रिक्शा चालक नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हम लोग चित्तू पांडेय चौराहे पास ई-रिक्शा खड़ा करते हैं और इसके एवज में प्रति टिप 20 रुपये यातायात पुलिस को देना पड़ता है।

वर्जन:
नोइंट्री में इंट्री गलत है, रही बात ई-रिक्शा खड़ा कराने की बात तो इस बारे में मुझे कुछ मालूम नहीं है। मैं जांच करवाता हूं।
श्री हरिप्रताप शाही
जिलाधिकारी बलिया

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