Ballia : पतिव्रत धर्म के द्वारा नारी जो कुछ भी चाहे वह हासिल कर सकती है : हिमांशु जी महाराज


मझौवां (बलिया)।
पतिव्रत धर्म के द्वारा नारी जो कुछ भी चाहे वह हासिल कर सकती है। पतिव्रता नारी से कुछ भी दुर्लभ नहीं है। अपने पति व्रत धर्म के द्वारा संसार की हर प्रकार की सुविधा प्राप्त कर सकती है। उक्त बातें मानस प्रचार परिषद दया छपरा द्वारा आयोजित 75वां नवदिवसीय मानस सम्मेलन में बक्सर बिहार से पधारे हिमांशु जी महाराज ने कहीं। बताया कि रामायण काल में सीता तो पतिव्रता थी ही परंतु उर्मिला का पती व्रत धर्म सर्वाेपरि है। उर्मिला उस प्रकार के पतिव्रता थी कि लक्ष्मण को वन गमन जाने के समय जो थाल सजाई थी आरती उतारने के लिए वो थाल लेकर खड़ी की खड़ी रह गई। 14 बरस तक उर्मिला उस स्थान से हीली ही नहीं। उसी दीपक को 14 बरस बाद जब प्रभु श्री राम के साथ लक्ष्मण अयोध्या लौटे तो उसी थाल की आरती लक्ष्मण को उतार कर थाल राखी। बीच में लक्ष्मण से कहीं भी थी कि अगर कहीं आप प्रभु सेवा में अपने को समर्थ समझे तो मेरे पति व्रत धर्म को लगा देना। कथा देर रात तक चलती रही, जहां श्रद्धालु नर-नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे। इस मौके पर हरेंद्र पांडे, बृजबली दुबे, सुशील पांडे, मुन्ना पांडे, लाल जी, बच्चा वर्मा सहित सैकड़ों नर-नारी उपस्थित रहे।

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