Ballia : मिलावटखोर नामी ब्रांड के नाम से बेच रहे नकली देशी घी


बैरिया (बलिया)।
क्या आप भी देशी घी के नाम पर जानवरों की चर्बी, पक्षियों के खुर और केमिकल की सुगंध वाला घी तो नहीं खा रहे। जी हां ये खबर खास तौर पर देशी घी इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए है। पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ मंे इस्तेमाल होने वाली घी मिलावटखोर क्षेत्र भर में नामी ब्रांड के नाम से देशी घी बेच रहे हैं। क्षेत्र के बाजारों में इनके बड़े-बड़े डिस्टरीब्यूटर हैं। जानकार बाताते है कि जानवरों की चर्बी से घी बनाकर बेची जा रही है। मरे हुए जानवरों की चर्बी को घंटों पकाकर उससे निकले पदार्थ में एसेंस डाला जाता था। इसे घी बताकर बाजार में सप्लाई हो रहा। यानी आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जानवरांे के चर्बी वाली घी टीन और पैकेट में पैक कर बेचा जा रहा है। यही नहीं ग्रामीण अंचलों में खुला देसी घी घूम-घूम कर घी बेचने वाले लोग बेच रहे हैं, जिसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है। सब कुछ जानकार भी खाद्य विभाग मौन है। देसी घी स्वास्थ्य वर्धक होने के कारण इसकी कीमत भी बहुत है, लेकिन गांव में फेरी लगाकर घी बेचने वाले लोग ढाई सौ से तीन सौ रुपये किलो देसी घी बेच रहे हैं। जिसे सुनकर लोगों को हैरानी हो रही है। इस संदर्भ में उप जिलाधिकारी बैरिया सुनील कुमार से पूछने पर बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो मैं खाद्य खाद्य विभाग को पत्र लिख रहा हूं।शीघ्र ही टीम बनाकर बाजारों में पहुंचकर घी का सैंपल लिया जाएगा और रिपोर्ट आने पर घी नकली होने पर गंभीर कार्रवाई होगी। किसी को स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जा सकती है।

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