Ballia : श्रीकृष्ण जन्म की कथा के साथ झांकी देख गूँजने लगे मंगलगीत


बलिया।
श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का कथा चल रहा था कि श्रीकृष्णजन्म की झांकी देख कथा सुन रहे श्रद्धालु आश्चर्य चकित हो गये। श्रीकृष्ण के जयकारे के नारे लगने लगे, टाफियां हवा में उछाली जाने लगी और महिलाएं नन्द जी के अंगना में आज बज गयी बधाई… मंगलगीत गाने लगी। स्टेशन मालगोदाम रोड पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा मर्मज्ञ पं0 कन्हैया पाण्डेय ने भगवान नारायण के कई अवतारों की कथा सुनाई और सभी कथाओं का रहस्य बताया। श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि कंश के अत्याचार बढ़ गया था, पृथ्वी भी परेशान हो गयी थी।

कंश ने अपनी प्यारी बहन देवकी का विवाह वासुदेव से करके उसकी विदाई कर उसे पहुंचाने के लिये ले जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसकी मौत का कारण बनेगा। यह सुनकर कंश देवकी की हत्या करने के लिये तलवार निकाला तो वासुदेव ने देवकी को जीवनदान देने की प्रार्थना की और जन्म लेते ही देवकी के पुत्रों को उसे सौंपने का भरोसा दिलाया। वासुदेव की बात को मानकर कंश ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बन्द करा दिया।

जन्म लेते ही एक-एक कर कंश ने देवकी के 6 पुत्रांे की हत्या कर दी। कृष्ण पक्ष की मध्य रात्रि में प्रभु चतुर्भुज रूप में कारागार में प्रकट हुए और देवकी के गर्भ में आ गए है। तब प्रभु ने वासुदेव को बताया कि आप मुझे यशोदा जी के पास पहुंचा दीजिए। वासुदेव जी श्रीकृष्ण को सुप में उठाएं उसी समय सूप में श्रीकृष्ण को लिए वासुदेव जी की झांकी कथा स्थल पर पहुंच गयी।

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सूप में श्रीकृष्ण को लिए वासुदेव के शक्ल में झांकी देख नारे लगने लगे, महिलाएं मंगलगीत गाने के साथ ही झूमने लगी और हवा में टाफियां उछाली जाने लगी। कथा मर्मज्ञ पं0 कन्हैया पाण्डेय ने मतस्य और वामन अवतार के कथाओं को विस्तार से सुनाया।

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