गाजीपुर सीट पर भाजपा से रामतेेज पांडेय के लड़ने की हो रही चर्चा

रोशन जायसवाल की एक रिपोर्ट
बलिया।
राजनीति में चर्चा आम बात है, बल्कि वक्ती तौर पर चर्चाएं उठती रहती है। राजनीतिक चर्चाओं का अपना एक अलग चरित्र भी होता है। भले ही चर्चा के पीछे कोई दम ना हो। बावजूद चर्चा उठाने वाले माफिक तर्क घुसेड़कर दावे के साथ उसे उठा देते है। जैसे जैसे चर्चा आगे बढती है वैसे उसमें नये नये तर्क उठते जाते हैं मगर एक सीमा पर पहुंचकर हवा में वह चर्चा असल तथ्य के अभाव में

दम भी तोड़ देती है। मसलन गाजीपुर संसदीय सीट को लेकर एक चर्चा उठी थी यही कि यह सीट भाजपा अपने सहयोगी दल सुभासपा के लिये छोड़ दी हैं, सुभासपा इस सीट पर बाहुबली बृजेश सिंह को मैदान में उतारेगी। चर्चा में यह तर्क जोड़ा गया था कि

मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गर्वनर हैं उस दशा में हाल फिलहाल उनका गाजीपुर लोकसभा सीट के लिये लौटना संभव नहीं हैं। तब मौजूदा सांसद अफजाल अंसारी को कड़ी टक्कर देने का माद्दा बृजेश सिंह में ही है। उस चर्चा को भी मीडिया ने खबर के रूप में परोसी। मगर वही हुआ बृजेश सिंह की चर्चा एक सीमा पर पहुंचकर तथ्य के अभाव में दम तोड़ दी। दरअसल वह चर्चा भाजपा के स्तर से दफन हुई।

भाजपा खेमे से खबर आयी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय सीट वाराणसी पर जीत की हैट्रिक लगानी हैं तब मोदी के प्रचार अभियान के लिये वाराणसी से सटी गाजीपुर सीट पर बतौर एनडीए उम्मीदवार बृजेश सिंह जैसा दागी चेहरा हरगिज सूट नहीं करेगा। विरोधी उसे मुद्दा बना देंगे। शायद यही वजह रही कि गाजीपुर आकर सुभासपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव डा. अरविंद राजभर ने बृजेश सिंह के लड़ने की चर्चा को सिरे से खारिज करनी पड़ी। बल्कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की एनडीए में दोबारा वापसी को भी कुछ लोग वाराणसी संसदीय सीट से भी जोड़ रहे हैं उसको लेकर उनके दलील भी काबिले गौर है।

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यह है कि एनडीए में दोबारा नीतिश कुमार के आने से बिहार में भाजपा को जो भी लाभ मिले लेकिन यह बात तो तय है कि वाराणसी संसदीय सीट पर भाजपा को सीधा लाभ मिलेगा। इस बात को ऐसे समझें, वाराणसी ससंदीय क्षेत्र के कुल पांच विधानसभाओं में सेवापुरी, रोहनिया, कैंट विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बाहुल्य हैं। मंत्री नीतिश कुमार भी कुर्मी बिरादरी से ही आते है। तब यही वजह थी कि जब नीतिश कुमार भाजपा के विरोध में थे तब भाजपा के सामने यूपी में लोकसभा चुनाव की शुरूआत वाराणसी से ही करने की अपनी योजना बनायी थी। यहां तक कि वाराणसी में अपनी रैली के लिये स्थल भी तय हो गया था। मगर बाद में उस स्थल के मालिकानों द्वारा नीतिश कुमार की रैली के लिये इंकार कर दिया गया था और उसके बाद नीतिश कुमार के रैली की तैयारी जहां का तहां रूक गयी। वैसे राजनीति में चर्चाए न रूकती है और न दावे ठहरते है, गाजीपुर संसदीय सीट को लेकर एक नई चर्चा सामने आयी हैं। यहीं कि रामतेज पांडेय भाजपा के उम्मीदवार हो सकते है कि हालांकि इस चर्चा में कितना दम है यह तो नहीं मालूम, मगर भाजपा के लिये रामतेज पांडेय भाजपा के प्रति समर्पण और निष्ठा पर कोई अंगूली नहीं उठा सकता।

उनकी साफ सुथरी छवि है। भाजपा के लिये गाजीपुर के ब्राह्मणों में रामतेज पांडेय एक बड़ा चेहरा हैं। जिला लगायत प्रदेश संगठन में अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन भी कर चुके है। मैं मूल बात पर आता हूं। ब्रजेश सिंह का गाजीपुर से एनडीए उम्मीदवार नहीं होंगे, हरगिज नहीं होंगे। कुल मिलाकर माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिये वाराणसी संसदीय सीट पूरी तरह निराबद्ध रहेगी।

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क्रेडिट- गाजीपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार राजकमल राय की एक रिपोर्ट

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बलिया।
पूर्वांचल की सबसे महत्वपूर्ण सीट गाजीपुर लोकसभा मानी जाती है क्योंकि यहां से रेलमंत्री रहे मनोज सिन्हा सांसद हुआ करते थे। अब यह सीट एनडीए की झोली में जाती है या फिर भाजपा स्वयं अपन प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय यह बना हुआ है कि अब इस सीट से पूर्व एमएलसी बाहुबली बृजेश सिंह को एनडीए चुनाव नहीं लड़ाएंगी।

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