Ballia : अधिकारियों के उदासीनता की भेंट चढ़ गई राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना


बैरिया (बलिया)।
सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना अधिकारियों के उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में धरातल पर दम तोड़ रही है। नगर हो या गांव पशु छुटा सड़कों पर घूम रहे हैं। बाजारों में सड़कों पर पशु अपना डेरा जमाए हुए हैं। वहीं गांव में खेतों में घुस कर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। अधिकारी कागजों में छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चला रहे हैं। मुख्य सचिव पशुपालन ने विगत 31 दिसंबर को समस्त जिलाधिकारियों को पत्र भेजा था कि जिसमें 1 जनवरी से लेकर 10 जनवरी तक अभियान चलाकर सभी छूट्टा गोवंशांे को गौ आश्रय स्थलों तक पहुंचाने का आदेश दिया था। जबकि आलम यह है कि किसान पकड़ कर गोवंशों को गौ आश्रय केंद्रों पर जाते हैं तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि गौ आश्रय केंद्र में अब जगह नहीं है। वहीं जिलाधिकारी हर सप्ताह इस संदर्भ में बैठक करके प्रगति रिपोर्ट भी तलब किये। जिला अधिकारियों को मुख्य सचिव ने निर्देशित किया था कि किसी भी हाल में सड़कों पर व खेतों में छुट्टा गोवंश दिखाई देते हैं तो पशुपालन विभाग के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। प्रमुख सचिव का यह आदेश मात्र आदेश बन कर रह गया। वहीं क्षेत्र के भगवानपुर स्थित गौ आश्रय केंद्र में 145 गोवंश फिलहाल मौजूद हैं। उनके लिए पर्याप्त चारा या रहने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दिन भर गोवंश गर्मी में कैम्पस में भटकते रहते हैं। वहीं गौ आश्रय केंद्र के मुख्य द्वार पर हमेशा ताला बंद रहता है। कर्मचारी नदारद रहते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशु चिकित्सक या पशु चिकित्सा कर्मी कभी भी इस गौ आश्रय केंद्र पर झांकने भी नहीं आते हैं। इस संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने के लिए पशु चिकित्साधिकारी मुरली छपरा से संपर्क साधने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल बंद था।

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